ईरान के सुप्रीम नेता अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद देश-विदेश में प्रतिक्रियाएँ तेज़ हैं।
लखनऊ शहर में आयोजित एक कथित शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को कवर करने गए एक मीडियाकर्मी पर भीड़ द्वारा घातक हमला किए जाने की गंभीर घटना सामने आई है। हमले में मीडियाकर्मी आयुष जो सेवरही, कुशीनगर निवासी के है ,गंभीर रूप से घायल हो गए l जबकि उनके सहयोगी कैमरापर्सन को भी बेरहमी से पीटा गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब मीडियाकर्मी ने प्रदर्शनकारियों से कुछ सवाल पूछने का प्रयास किया, तभी माहौल अचानक उग्र हो गया। सैकड़ों की संख्या में मौजूद भीड़ ने उन्हें घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान न केवल माइक छीन लिया गया, बल्कि कैमरा भी जबरन छीनकर ले जाया गया, जो अब तक बरामद नहीं हो सका है।
यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, तो एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने पर इस प्रकार का हिंसक और जानलेवा हमला किस हद तक उचित है? क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध बन गया है?

स्थिति उस समय और भयावह हो गई जब जान का वास्तविक खतरा महसूस होने लगा। मौके पर मौजूद 3-4 स्थानीय नागरिकों ने साहस दिखाते हुए हस्तक्षेप किया और मीडियाकर्मी तथा कैमरापर्सन को भीड़ से सुरक्षित बाहर निकाला। समय पर मदद नहीं मिलती तो बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता था।
पत्रकारों पर हमला और उपकरणों की लूट लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। प्रशासन से मांग की गई है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए, लूटा गया कैमरा बरामद किया जाए तथा आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
