झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन का निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूँ….”
कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे शिबू सोरेन
शिबू सोरेन को को जून के आखिरी सप्ताह में किडनी संबंधी समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 81 साल के गुरुजी लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। वो एक साल से डायलिसिस पर थे। और उन्हें डायबिटीज की भी बीमारी थी। पूर्व सीएम की हार्ट की बायपास सर्जरी भी हो चुकी थी।
उनका इलाज न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी। उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। इससे उनके शरीर के बाईं ओर पैरालिसिस हो गया था।
झारखंड की राजनीति के दिशोम गुरु
झारखंड के संथाल आदिवासी समुदाय में जन्मे शिबू सोरेन का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। जब उनकी उम्र महज 13 वर्ष थी तब महाजनों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी। उसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और महाजनों के खिलाफ आदिवासी समाज को इकट्ठा करने लगे।
1970 में वे महाजनों के खिलाफ खुल कर सामने आए और धान कटनी आंदोलन की शुरुआत की। 1973 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया, जिसका उद्देश्य बिहार के जंगल और आदिवासी इलाक़ों से अलग झारखंड राज्य बनाना था। लगभग तीन दशकों के संघर्ष के बाद उनका उद्देश्य साल 2000 में हासिल हुआ था। झारखंड को बिहार से अलग कर एक राज्य का दर्जा दिया गया।
झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे, 7 बार लोकसभा पहुंचे , केंद्रीय मंत्री के तौर पर दिया योगदान
वरिष्ठ आदिवासी नेता शिबू सोरेन ने 38 वर्ष से अधिक समय तक झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्व किया। उन्होंने झारखंड के लिए कई आन्दोलन चलाए और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने पहली बार 2 मार्च 2005 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण 12 मार्च 2005 को इस्तीफा देना पड़ा। पहली बार वह 10 दिन ही सीएम रह सके। दूसरी बार 27 अगस्त 2008 को वह मुख्यमंत्री बने और 19 जनवरी 2009 तक इस पद पर रहे। तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को मुख्यमंत्री पद संभाला और 1 जून 2010 तक रहे। 1980 से 2019 तक दुमका सीट से चुनाव जीतकर सात बार लोकसभा पहुंचे थे. 2019 में उन्हें बीजेपी उम्मीदवार सुनील सोरेन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी देश को अपनी सेवाएं दीं। झारखंड की राजनीति के वह सबसे बड़ी शख्सियत रहे और देश की सिसायत में भी उनका बोलबाला रहा। झारखंड में उन्हें दिशोम गुरु (देश का गुरु) कहकर पुकारा जाता है जिसका अर्थ है “देश का गुरु”।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि, “शिबू सोरेन जी एक ज़मीनी नेता थे, जिन्होंने जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में ऊंचाइयों को छुआ। वह आदिवासी समुदाय, ग़रीबों और वंचितों के सशक्तिकरण के लिए विशेष रूप से समर्पित थे।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “उनके निधन से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।” पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात कर संवेदना व्यक्त की है।
Story coverd by Siddhartha Gupta

