आज हम गर्व से अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। तिरंगा हवा में लहरा रहा है, भाषण हो रहे हैं, परेड हो रही है, और हर गली–नुक्कड़ पर देशभक्ति के गीत गूंज रहे हैं। लेकिन इस शोरगुल के बीच, एक सवाल दिल को चुभता है कि क्या आज़ादी सिर्फ़ इंसानों के लिए है?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया। वजह? लोगों की सुरक्षा। पर क्या उन्हें सड़कों से “हटाना” ही समाधान है? उन बेज़ुबानों ने किसका क्या बिगाड़ा, सिवाय इसके कि वे हमारे शहरों के विकास के शोर में कहीं खो गए और हमारे द्वारा छोड़े गए कचरे में अपनी भूख मिटाते रहे।
विडंबना देखिए कि जिन बेज़ुबानों की कोई गलती नहीं, उन्हें पकड़कर फेंका जा रहा है। और जिन लोगों ने बलात्कार जैसे अमानवीय अपराध किए, वे कई बार कानून की कमज़ोरियों के कारण सालों तक खुले घूमते हैं। यह कैसी न्याय की तस्वीर है?
स्वतंत्रता का मतलब सिर्फ़ “विदेशी हुकूमत से मुक्ति” नहीं, बल्कि हर जीव को अपने अस्तित्व के साथ जीने का अधिकार देना भी है। अगर हम इंसान होते हुए अपनी आज़ादी को इतना कीमती मानते हैं, तो क्या जानवरों की आज़ादी का कोई मूल्य नहीं? क्या तिरंगे की छांव सिर्फ़ हमारे लिए है और उन मासूम आंखों के लिए नहीं, जो बिना कुछ कहे बस देखती रहती हैं?
दिल्ली की सड़कों पर घूमते वे कुत्ते कभी किसी के पालतू थे, कभी किसी बच्चे के खेल का साथी, और अब “खतरा” कहकर भगा दिए जाएंगे। यह वही देश है, जो अहिंसा के सिद्धांत पर दुनिया को संदेश देता है। यह वही संस्कृति है, जो गाय, कुत्ते, बिल्ली, गिलहरी तक में भगवान का अंश देखती है। फिर यह क्रूरता क्यों?
हमारी आज़ादी का असली मतलब तभी पूरा होगा, जब हम अपने चारों ओर रहने वाले हर जीव को बराबरी का हक़ देंगे फिर चाहे वह इंसान हो या जानवर। हमें यह तय करना होगा कि हम किस तरह का देश बनाना चाहते हैं , एक ऐसा भारत, जो सिर्फ़ अपने नागरिकों को स्वतंत्र रखे या ऐसा भारत, जो हर जीव के जीवन को सम्मान दे।
तभी होगा, जब किसी सड़क पर ठंड से काँपता कुत्ता भूखा न सोए, जब किसी जंगल से कोई तेंदुआ सिर्फ़ इसलिए न मारा जाए कि वह इंसानों की बस्ती में भटक आया, और जब हर जीव बिना डर के सांस ले सके।
तभी हम गर्व से कह पाएंगे ..हाँ, यह सचमुच स्वतंत्र भारत है।
Story by Ayush Singh

