बिहार की राजधानी पटना एक नई और ऐतिहासिक परिवहन क्रांति की दहलीज पर खड़ी है। जल्द ही यहां वाटर मेट्रो सेवा की शुरुआत होने जा रही है, जो न सिर्फ शहर के ट्रैफिक को राहत देगी, बल्कि गंगा नदी के ऐतिहासिक महत्व को भी आधुनिक परिवहन के साथ जोड़ने का कार्य करेगी। यह पहल केंद्र सरकार की उस महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसमें देश के 17 प्रमुख शहरों को जलमार्ग से जोड़कर परिवहन को ज्यादा प्रभावी, टिकाऊ और पर्यावरण-संवेदनशील बनाया जाना है।
इस महत्वाकांक्षी योजना में पटना को पहले चरण में शामिल किया गया है, जो राज्य के लिए गर्व की बात है। यह परियोजना एक ओर जहां शहरवासियों के लिए सफर को आसान बनाएगी, वहीं दूसरी ओर पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास के नए रास्ते खोलेगी।

कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड की टीम ने किया सर्वेक्षण
इस प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू करने से पहले कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL) की एक विशेषज्ञ टीम ने हाल ही में पटना का दौरा किया। इस टीम में एसडीजीएम निशांत एन, जल परिवहन विशेषज्ञ अर्जुन कृष्णा और जरीन सैम जेनसन जैसे अधिकारी शामिल थे।
टीम ने गंडक, सोनपुर, हाजीपुर, दीघा, दानापुर, गायाघाट, बिदुपुर, पहलेजा घाट और कोन्हेरा जैसे विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया और गंगा के जलमार्ग की गहराई, संरचना और संभावनाओं का गहन अध्ययन किया।
इन इलाकों को इसलिए चुना गया क्योंकि वे गंगा के किनारे बसे हैं और शहरी आबादी के एक बड़े हिस्से को कनेक्ट करते हैं। सर्वेक्षण के दौरान टीम ने स्थानीय परिस्थिति, तकनीकी बाधाओं, मौसमीय प्रभाव और संभावित घाटों की स्थापना की व्यवहारिकता पर भी चर्चा की।
पहले चरण में गंडक से एनआईटी पटना तक चलेगी सेवा
योजना के पहले चरण में गंडक नदी से होकर एनआईटी पटना तक वाटर मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी। इसके तहत गंगा के किनारे बसे इलाकों को वाटर टर्मिनल से जोड़ा जाएगा। इस रूट पर विशेष ध्यान दिया गया है क्योंकि यह इलाका न केवल घनी आबादी वाला है, बल्कि तकनीकी संस्थानों, कार्यालयों और व्यावसायिक केंद्रों से भी जुड़ा हुआ है।
इसका उद्देश्य है कि लोगों को एक वैकल्पिक, सुरक्षित, समयबचाऊ और किफायती यात्रा साधन मिले। खासकर उन लोगों के लिए जो रोज़ाना जाम की समस्या से जूझते हैं, यह सेवा किसी वरदान से कम नहीं होगी। साथ ही, यह पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी।
ट्रैफिक में राहत और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
पटना में ट्रैफिक एक बड़ी समस्या है। संकरी सड़कों, बढ़ते वाहन और अनियंत्रित यातायात व्यवस्था के बीच वाटर मेट्रो एक बड़ा समाधान लेकर आ रही है। इस सेवा के शुरू होते ही सड़क यातायात का दबाव कम होगा, जिससे ईंधन की खपत और प्रदूषण भी घटेगा।
वहीं दूसरी ओर, गंगा नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को वाटर मेट्रो के जरिये जोड़ना पर्यटन को नई ऊंचाई देगा। विदेशी और घरेलू पर्यटक गंगा यात्रा के साथ-साथ ऐतिहासिक स्थलों जैसे गोलघर, कुम्हरार, महावीर मंदिर, सोनपुर मेला स्थल आदि को आसानी से जल मार्ग से देख सकेंगे।
हरित परिवहन की ओर एक मजबूत कदम
इस योजना को हरित (ग्रीन) परिवहन की दिशा में भी एक बड़ी पहल माना जा रहा है। जल परिवहन सड़क या रेल की तुलना में ज्यादा ऊर्जा दक्ष होता है। इससे न केवल प्रदूषण कम होता है बल्कि लागत भी कम आती है। अगर पटना में यह मॉडल सफल रहा, तो इसे देश के अन्य शहरों में भी अपनाया जा सकता है।
साथ ही, गंगा जैसी पवित्र नदी को केवल धार्मिक भावना से नहीं, बल्कि आधुनिक उपयोगिता के तौर पर देखने की यह एक सकारात्मक शुरुआत है। यह गंगा को केवल आस्था की धारा न मानकर, जीवन रेखा के रूप में स्थापित करने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। नाव संचालन, टर्मिनल प्रबंधन, मेंटेनेंस, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटन गाइड जैसी सेवाओं के लिए प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता होगी। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही शहर में काम करने का अवसर मिलेगा।
भविष्य के लिए क्या है योजना?
भविष्य में इस वाटर मेट्रो सेवा का विस्तार हाजीपुर, दीघा, दानापुर और बिदुपुर जैसे इलाकों तक करने की योजना है। इससे गंगा किनारे बसे शहरों को एक जलमार्गीय कॉरिडोर के ज़रिये जोड़ा जा सकेगा। इसके अलावा, आने वाले वर्षों में इस नेटवर्क को और भी स्मार्ट बनाने की योजना है—जैसे ऐप बेस्ड टिकटिंग सिस्टम, लाइव ट्रैकिंग और मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन।
बदलते पटना की एक नई पहचान

पटना के लिए यह सिर्फ एक परिवहन योजना नहीं, बल्कि आधुनिकता और परंपरा के संगम की एक नई मिसाल है। जिस गंगा को अब तक हम केवल पूजा और आस्था से जोड़ते आए थे, अब वही नदी शहर को जोड़ने वाली जीवनरेखा बन जाएगी।
वाटर मेट्रो के शुरू होते ही पटना देश के पहले शहरों में से एक बन जाएगा, जहां जल परिवहन को मेट्रो स्तर पर विकसित किया गया है। यह पहल न केवल राजधानी की पहचान को नया आयाम देगी, बल्कि आने वाले समय में एक मॉडल सिटी के रूप में पटना को स्थापित भी करेगी।
Report by Sonam Singh
