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भागलपुर में नेशनल हाईवे पर ऑटो चालकों की मनमानी: ओवरलोडिंग बनी जानलेवा, प्रशासन बेपरवाह

भागलपुर, बिहार।
भागलपुर जिले में नेशनल हाईवे पर ऑटो चालकों की मनमानी और ओवरलोडिंग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हमारी Teekhi Varta टीम को इस लापरवाही का प्रत्यक्ष गवाह तब बनना पड़ा, जब रिपोर्टिंग से लौटते समय एक ऑटो चालक ने अपनी गाड़ी में खतरनाक स्तर तक ओवरलोडिंग कर रखी थी। खास बात यह रही कि ऑटो के पिछले हिस्से में महिलाएं बैठी थीं, जिनकी जान किसी भी क्षण हादसे का शिकार हो सकती थी।

मौके पर रोका गया ऑटो, दी गई चेतावनी

जब हमारी टीम की नजर इस ऑटो पर पड़ी, तो तुरंत गाड़ी को रुकवाया गया और चालक को उसकी लापरवाही का अहसास दिलाया गया। चालक को बताया गया कि यह ओवरलोडिंग न सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की जान के साथ भी खिलवाड़ है। चेतावनी दी गई कि अगली बार ऐसी गलती दोहराने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, कुछ समझाने पर चालक ने गलती मानी और आगे से ऐसा न करने का वादा भी किया।

ये किसी एक ऑटो चालक की कहानी नहीं…

यह मामला कोई अपवाद नहीं है। भागलपुर के हाईवे पर हर दिन ऐसे सैकड़ों ऑटो देखे जा सकते हैं, जो निर्धारित सीमा से कई गुना ज्यादा सवारियों को ठूंस कर भरते हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि ओवरलोडिंग के कारण दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन की आंखें मूंदे बैठा है।

पुलिस क्यों कर रही अनदेखी?

नेशनल हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर इस तरह की लापरवाही सवाल खड़े करती है कि आखिर ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? पुलिस की इस निष्क्रियता के कारण ऑटो चालक बेखौफ होकर नियमों को तोड़ रहे हैं। कहीं न कहीं यह लापरवाही एक गंभीर सिस्टम फेलियर को भी दर्शाती है।

क्यों जानबूझकर होती है ओवरलोडिंग?

अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में ऑटो चालक तय सीमा से ज्यादा सवारी बिठाते हैं। अगर 4 लोगों की क्षमता वाले ऑटो में 8 से 10 सवारी बैठ जाएं तो किराए की रकम भी दोगुनी-तिगुनी हो जाती है। सवारी भी जल्दी गंतव्य तक पहुंचने के लिए किसी तरह बैठने को तैयार हो जाती है, जिससे चालक का मुनाफा बढ़ता है और नियमों का उल्लंघन आम बात बन जाता है।

हादसों का डर, पर जिम्मेदारी किसकी?

भागलपुर हाईवे पर पिछले कुछ महीनों में कई ऑटो हादसे हुए हैं, जिनमें ओवरलोडिंग ही मुख्य वजह रही। लेकिन अब तक न तो कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाया गया। अगर ऐसी लापरवाही जारी रही तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सवाल यह भी उठता है कि इस तरह की घटनाओं पर नियंत्रण किसकी जिम्मेदारी है – पुलिस, आरटीओ विभाग या स्थानीय प्रशासन की?

सवाल जस का तस: कब जागेगा प्रशासन?

Teekhi Varta की टीम का यह अनुभव एक बड़े सवाल की तरफ इशारा करता है – भागलपुर जैसे बड़े जिले में नेशनल हाईवे पर बिना किसी रोकटोक के ओवरलोडिंग कैसे हो रही है? जब मीडिया की टीम को ऑटो रुकवाकर खुद हस्तक्षेप करना पड़े, तो यह प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। आखिर पुलिस और आरटीओ अधिकारी किस दिन के इंतजार में हैं?

भागलपुर हाईवे पर ओवरलोडिंग अब सामान्य समस्या बन गई है, जो हर दिन दर्जनों लोगों की जान जोखिम में डाल रही है। पुलिस की निष्क्रियता और चालकों की मनमानी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। अब जरूरत है कि प्रशासन जागे, सख्त कार्रवाई करे और लोगों को जागरूक बनाया जाए। अन्यथा, भविष्य में किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी से कोई बच नहीं पाएगा।

Report by Ayush Singh ( Makhanlal Chaturvedi National University Of Journalism & Communication)

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