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आम आदमी की मौत और मुआवजा: टूटी हुई व्यवस्था का चेहरा

आम जनमानस जो राष्ट्र और सरकार का निर्माण करता है जिसके लिए सरकार वादा करती है कि वे आम नागरिक का विकास करेंगे सरकारी आदमी पुलिस शासन और जो डॉक्टर शपथ लेते हैं कि उनके लिए यह देश सर्वोपरि होगा वे तत्परता के साथ आम नागरिक के साथ खड़े रहेंगे परंतु विडंबना या देखी कि जब इनके ऊपर सरकारी कर्मचारी का ठप्पा लगाता है तो यह सब भूल जाते हैं और बस याद रहता है तो सिर्फ स्वयं का विकास और आम जनमानस को मिलता है सिर्फ वादा एक अच्छी शिक्षा का एक अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था और एक अच्छी शासन व्यवस्था का जनता को हर जगह अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ रहा है कहीं सरकारी अस्पताल में बेड के लिए कहीं सरकारी विद्यालय में शिक्षा के लिए कही जलसंकट के लिए कहीं थाने में शिकायत दर्ज कराने के लिए तो कहीं अपने चाहने वालों की मौत पर जांच करवाने के लिए। जनता रोज मर रही है कहीं पंजाब, बिहार और हिमाचल के बाढ़ में तो कहीं रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में कही खेतों में तो कहीं प्रयागराज की भीड़ में कही फुटपाथ पर तो कही किसी फैक्ट्री में आग लगने से तो कहीं किसी तेज रफ्तार वाहन से और देश की पुलिस, वकील, न्यायालय, गुनहगार को कुछ नहीं कहेगा अगर कहेगा तो सिर्फ़ एक पेज रोड सेफ्टी पर लेख लिखने के लिए। अगर किसी के शो के कारण भगदड़ में कुछ लोगों के मृत्यु हो भी जाए तो यह सिस्टम हर हद तक जाएगा उसको बचाने के लिए। और जब यह आम आदमी अपने हक़ और गुनहगारों पर कार्यवाही के लिए उठ खड़ा होगा तो उसे जाँच का ठंडा बसता पकड़ा दिया जाएगा और मुआवजे का चूर्ण चटा दिया जाएगा। हमे न्याय व्यवस्था में सुधार करने के जरूरत है जिससे जनता को आसानी से न्याय मिल सके और एक पारदर्शिता स्थापित हो सके।

ये लेखक के अपने निजी विचार है। तीखी वार्ता निजी विचारों का समर्थन नहीं करता है ।


Himanshu Tiwari



2 thoughts on “आम आदमी की मौत और मुआवजा: टूटी हुई व्यवस्था का चेहरा”

  1. Kuch baat toh hai aap mai jo itna badhiya article likh deta apne sarkar lagta hai aab apko hi utrana padega govt mai tabhi kuch shudhar ayega

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