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“भर्ती नहीं, धांधली है!” – SSC परीक्षा को लेकर छात्रों का हंगामा

नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की सेलेक्शन पोस्ट फेज-13 परीक्षा में कथित धांधली और कुप्रबंधन के खिलाफ देशभर के छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। दिल्ली से लेकर पटना, लखनऊ, जयपुर और भोपाल तक छात्र-छात्राएं लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस विरोध का मुख्य केंद्र दिल्ली बना, जहां लगातार दूसरे दिन भारी प्रदर्शन देखने को मिला।

क्या है पूरा मामला?

SSC की सेलेक्शन पोस्ट फेज-13 परीक्षा को लेकर छात्रों ने लंबे समय से शिकायतें दर्ज कराई थीं—प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी, पारदर्शिता की कमी और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर। छात्रों का आरोप है कि आयोग एक के बाद एक परीक्षाएं आयोजित कर रहा है, लेकिन नतीजे या चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बिल्कुल नहीं है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर OMR शीट्स में हेरफेर, परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था और रिजल्ट प्रक्रिया में देरी जैसी समस्याओं को उजागर किया। उनका कहना है कि SSC जैसे बड़े संस्थान से इस तरह की लापरवाही युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

जंतर-मंतर से DoPT दफ्तर तक पहुंचा आक्रोश

गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र नारेबाजी करते हुए इकट्ठा हुए। उनकी मांग थी कि SSC की कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन लाया जाए, और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।शुक्रवार को प्रदर्शन का स्वरूप और तीखा हो गया जब छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों ने भी इस आंदोलन में भाग लिया। कई शिक्षक, जो वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थानों से जुड़े हैं, खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आए। प्रदर्शनकारी शुक्रवार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के बाहर जमा हुए और आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की।

हिरासत में शिक्षिका नीतू सिंह समेत कई प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़पें भी हुईं। प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया। “नीतू मैम” के नाम से मशहूर प्रतियोगी परीक्षाओं की चर्चित शिक्षिका नीतू सिंह भी इस विरोध का हिस्सा थीं। जब छात्र DoPT कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, उस वक्त नीतू सिंह मौके पर मौजूद थीं और उन्हें भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

हालांकि देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन सोशल मीडिया पर #ReleaseNeetuMaam ट्रेंड करता रहा। नीतू सिंह ने रिहा होने के बाद एक वीडियो संदेश में कहा,

“हम चुप नहीं बैठेंगे, ये सिर्फ मेरी नहीं, लाखों छात्रों की लड़ाई है। हमें अपना हक चाहिए और पारदर्शी सिस्टम चाहिए।”

“भर्ती प्रक्रिया मज़ाक बन चुकी है” पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वीडियो फुटेज में देखा गया कि छात्रों को जबरन खींचा गया, शिक्षकों को लाठियों से हटाया गया।

सोशल मीडिया पर इस घटना की व्यापक आलोचना हुई। ट्विटर (अब X) पर #SSC_Protest, #NeetuMaam, और #JusticeForAspirants जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

अब क्या चाहते हैं छात्र?

छात्रों की मुख्य मांगें कुछ इस प्रकार हैं:

  • SSC की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता
  • निष्पक्ष और समयबद्ध परिणाम
  • DoPT की निगरानी में जांच
  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई
  • छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को आयोग से सीधी बातचीत का मौका

सरकार की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले पर अब तक SSC या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। न ही प्रदर्शन को लेकर किसी जांच समिति के गठन की घोषणा की गई है। जबकि देशभर में हजारों छात्रों की मेहनत और समय इस परीक्षा प्रक्रिया में दांव पर है, ऐसे में सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

क्या यह आंदोलन नया मोड़ लेगा?

अब देखना यह है कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तीखा रूप लेता है या सरकार की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जाता है।
यदि छात्रों की मांगों को जल्द नहीं सुना गया, तो यह विरोध केवल SSC तक सीमित नहीं रहेगा—बल्कि देश के बेरोजगार युवाओं के व्यापक आंदोलन का रूप भी ले सकता है।

Teekhi Varta का निष्कर्ष

जब सिस्टम मौन हो और छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हों, तब यह सवाल उठता है—क्या वाकई हमारे देश में रोज़गार और शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है?

कर्मचारी चयन आयोग जैसे बड़े संस्थान की जवाबदेही सुनिश्चित करना न सिर्फ युवाओं के लिए, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी ज़रूरी है।


Story covered by Ayush Singh

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