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सैयारा मूवी समीक्षा: दर्द, प्यार और संगीत का संगम

भारतीय सिनेमा एक के बाद एक सुपरहिट फिल्मे लेकर आ रहा है। बीते दिनों मेट्रो इन दिनों ने सिनेमाघरों में खूब धमाल मचाया था और अब मोहित सूरी द्वारा निर्देशित सैयारा फिल्म सभी के दिलो पर राज़ कर रही है। फिल्म की कहानी ऐसी है कि जो भी थिएटर पर ये फिल्म देखने जा रहा है वह रोते हुए बाहर आ रहा है।

फिल्म किस वर्ग से जुड़ी है

फिल्म युवाओ के दिलो को छू रही है. यह फिल्म २ युवाओ की प्रेम कहानी पर बनी है. मोहित सूरी द्वारा निर्देशित ये फिल्म एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा है। इस फिल्म के हीरो अहान पांडेय और हीरोइन अनीत पड्डा हैं. अहान और अनीत दोनों की ही ये डेब्यू फिल्म है. दर्शक इस फिल्म को बहुत प्यार दे रहे हैं.
भारतीय सिनेमा में युवाओ के प्रेम पर आधारित ऐसी फिल्म लगभग २० साल बाद आयी है एक कारण ये भी है की लोग इस फिल्म को बेहद पसंद कर रहे हैं. यह एक म्यूजिकल फिल्म है इसके सभी गाने बड़ी म्यूजिकल टीमों द्वारा बनाये गए हैं जिनमे मिथुन, तनिष्क बागची, विशाल, अरिजीत सिंह जैसे गायक शामिल हैं. फिल्म का हर गाना बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है. गानो के बोल काफी प्यारे हैं.

क्या है फिल्म की कहानी

फिल्म में अहान ‘कृष कपूर’ की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं अनीत ‘वाणी बत्रा’ के किरदार में नजर आ रही हैं। फिल्म का ट्रेलर आने के बाद से ही यह युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई थी और रिलीज होने के पहले ही दिन फिल्म ने लगभग 100 करोड़ रुपए कमा लिए थे।

कृष कपूर एक बड़ा गायक बनना चाहता है और इसके लिए संघर्ष कर रहा है। वाणी बत्रा एक मीडिया इंटर्न है जो बहुत अच्छा लिखती है। दोनों के जीवन का अतीत काफी दर्दनाक रहा है। फिल्म में दिखाया गया है कि कृष की मां का निधन उसके बचपन में हो जाता है, जिसके बाद उसके पिता शराबी हो जाते हैं। दूसरी ओर, वाणी को उसके शादी वाले दिन उसका होने वाला पति महेश अय्यर – जो उसका कॉलेज सीनियर था – छोड़ कर चला जाता है, जिससे वह डिप्रेशन में चली जाती है। वह लिखना छोड़ देती है और एक कमरे में बंद रहने लगती है।

फिर एक दिन वाणी एक मीडिया कंपनी में इंटर्नशिप के लिए जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात कृष कपूर से होती है। वाणी हमेशा अपने साथ एक डायरी रखती है, जिसमें वह अपनी कविताएं और गाने लिखती है।

फिल्म का फर्स्ट हाफ दर्शकों को स्क्रीन से बांध कर रखता है। आगे चलकर वाणी की अपने अतीत – यानी महेश – से मुलाकात हो जाती है, जिसे वह भूलना चाहती है। फिर वाणी को एक ऐसी बीमारी हो जाती है, जिससे वह चीजें भूलने लगती है। वह यह बात सबसे छुपा कर रखती है, यहां तक कि कृष से भी।

एक दिन कृष को वाणी की बीमारी के बारे में पता चल जाता है और वाणी के घरवालों की सहमति से वह वाणी को कुछ दिन के लिए एक शांत जगह पर ले जाता है। वहां वे दोनों प्यार से वक्त बिताते हैं। वाणी कृष के सपनों को पूरा करने में उसका साथ देती है। लेकिन जब कृष को पता चलता है कि वाणी सब कुछ भूलने लगी है, तो वह अपना करियर और सब कुछ छोड़कर वाणी के पास लौट आता है।

कृष के दोस्त उसे रोकते हैं, लेकिन वह नहीं मानता। उसके दोस्त कहते हैं कि वह वाणी को छोड़कर अपने सपनों को जिए, तो कृष जवाब देता है – “बेशक पूरी दुनिया कृष कपूर को याद रखे, मगर वो तो भूल रही है।”

फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जहां कृष और वाणी एक-दूसरे से कहते हैं – “हम हमेशा साथ रहेंगे, फॉरएवर एंड एवर एंड एवर।” फिल्म का एक डायलॉग बहुत वायरल हो रहा है –
“सैय्यारा… मतलब तारों में एक तन्हा तारा… खुद जल के रोशन कर दे ये जग सारा… और वो तुम हो मेरे सैयारा।”

यह डायलॉग वाणी कृष से कहती है। वह कहती है, “भले ही मैं सब भूल जाऊं, मगर जब भी तारों की तरफ देखूंगी, तो तुम मुझे याद आओगे।”

इसके बाद फिल्म एक नया मोड़ लेती है – वाणी सब कुछ छोड़कर कहीं गायब हो जाती है। किसी को नहीं पता होता कि वह कहाँ है। कृष उसे ढूंढने की बहुत कोशिश करता है, मगर वह नहीं मिलती।

फिर कृष को याद आता है कि वाणी ने कहा था कि वह एक ऐसा गाना लिखेगी जिसे सुनकर कोई लड़की अपने प्रेमी को कभी नहीं छोड़ेगी। कृष उस गाने को बनाता है और वह गाना सुपरहिट हो जाता है। मगर वाणी फिर भी नहीं मिलती।

वाणी को ढूंढते हुए कृष को लगभग एक साल बीत जाता है। फिर एक दिन कृष का सिंगिंग कॉन्सर्ट लंदन में होता है। वहां जब वे सेटअप कर रहे होते हैं, तो गाने पर बनी सभी वायरल रील्स एक बड़े स्क्रीन पर दिखाई जाती हैं। तभी एक रील में कृष को वाणी छुपी हुई नजर आती है और स्क्रीन वहीं पॉज हो जाती है। यह सीन दर्शकों को बेहद भावुक कर देता है।

इसके बाद कृष अपना अच्छा-खासा करियर छोड़कर इंडिया लौट आता है और उसे पता चलता है कि वाणी शायद मनाली में है। कृष मनाली पहुंचता है, जहाँ उसे वाणी का लिखा एक खत मिलता है। कृष वह खत पढ़कर भावुक हो जाता है। फिर उसे वाणी मिल जाती है, मगर वह उसे पहचानती नहीं, भूलने की बीमारी के कारण।

कृष हार नहीं मानता और उसे सब याद दिलाने की कोशिश करता है। कहते हैं, प्यार सच्चा हो तो वह मौत को भी हरा सकता है – यहां तो बस एक बीमारी थी। कृष की लाख कोशिशों के बाद वाणी को सब कुछ याद आ जाता है और फिल्म के अंत में दोनों की शादी हो जाती है।

इस पूरी यात्रा में कई ऐसे मोड़ आते हैं जो दर्शकों को रुला देते हैं।

फिल्म रिव्यू, सीख और युवा प्रेम

फिल्म की कहानी वाकई दिल को छू लेने वाली है. अगर प्यार सच्चा हो तो इंसान पूरी दुनिया जीत सकता है और यदि पार्टनर साथ देने वाला हो तो सब कुछ आसान हो जाता है। फिल्म से एक बार फिर मोहित सूरी सभी की पसंद बन गए हैं. फिल्म युवाओ के प्रेम को बाखूबी बयां करती है,और सच्चे प्यार की एक अलग परिभाषा सभी के बीच रखती नज़र आती है. फिल्म का गाना सैयारा सभी की जुबां पर चढ़ा हुआ है थिएटर में भी कॉन्सर्ट जैसा माहौल बनने की कई वीडियोस सामने आ रही हैं. फिल्म पर तरह तरह की रील्स बन रही हैं और इंस्टाग्राम ट्विटर फेसबुक के साथ पूरे इंटरनेट पर फिल्म ट्रेंडिंग नंबर १ पर चल रही है.



Review by Palak Gupta ( Sri Guru Nanak Dev Khalsa College, University of Delhi )

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