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योगी आदित्यनाथ ने की बीसीसीआई से बड़ी मांग, उत्तर प्रदेश में 4 रणजी टीमें बनाए जाए

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने आग्रह किया है कि उत्तर प्रदेश से 4 रणजी टीमें दी जाए। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाले इस प्रदेश के लिए एक टीम पर्याप्त नहीं है। चार टीम होने से युवा प्रतिभाओं को अधित अवसर मिलेगा। उनके इस मांग को लेकर खिलाड़ियों में उत्साह है, लेकिन फैसला बीसीसीआई पर निर्भर है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में आयोजित UP टी20 लीग के फाइनल में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने क्रिकेट से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए कहा कि, “यूपी के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच मिलना चाहिए। इस राज्य ने इंटरनेशनल लेवल के कई खिलाड़ी तैयार किए हैं। चूंकि यूपी 25 करोड़ की बड़ी आबादी वाला राज्य है, इसलिए मैं BCCI से मांग करता हूं कि यूपी को कम से कम चार टीम मिलें”।
हालांकि, यूपी ने आखिरी रणजी खिताब साल 2005–6 में मोहम्मद कैफ की कप्तानी में जीता था।

मोहसिन रजा ने किया समर्थन

मुख्यमंत्री की इस मांग को भाजपा नेता और पूर्व राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी मोहसिन रजा ने सराहा है. उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने खिलाड़ियों के दिल की बात कह दी है. मोहसिन रजा, जो खुद योगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं, लंबे समय से यह मुद्दा उठाते रहे हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में चार रणजी टीमें होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले से तीन-तीन टीमें हैं. जब वहां यह संभव है तो उत्तर प्रदेश में चार टीमें क्यों नहीं हो सकतीं?”

गुजरात और महाराष्ट्र के पास 3 घरेलू टीमें

गुजरात और महाराष्ट्र के पास 3–3 रणजी टीम है। गुजरात के अलावा बड़ौदा, सौराष्ट्र गुजरात की घरेलू टीम है, जबकि महाराष्ट्र के अलावा मुंबई, विदर्भ महाराष्ट्र की घरेलू टीम हैं। अब योगी ने भी बीसीसीआई से 4 टीमों की मांग कर दी है। हालांकि, ये मांग कोई नई नहीं, बल्कि बहुत पुरानी है।

यूपी क्रिकेट के लिए नया अध्याय?

योगी आदित्यनाथ की यह पहल उत्तर प्रदेश में क्रिकेट की दिशा और दशा बदलने वाली साबित हो सकती है। इतने बड़े राज्य में एक ही रणजी टीम लंबे समय से खिलाड़ियों के अवसर सीमित कर रही है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की तर्ज पर अगर यूपी को भी चार टीमें मिलती हैं, तो यहां के युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का ज्यादा मौका मिलेगा। अब सबकी निगाहें बीसीसीआई के अगले कदम पर टिकी हैं।


Story covered by Siddhartha Gupta



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